एक तुमसे जुदा होने के बाद
एक तुमसे जुदा होने के बाद ,हर सांस सजा हो गई
यूँ ही साथ साथ चलते ,न जाने क्या खता हो गई
कि दिल में हूक उठती है .कि आँखें रोज बहती हैं
फिसलती सी वो तारीखें ,तुम्हारी राह तकती हैं
कहीं उस पार से तुम भी .,ये मंज़र देखते होगे
कहो कुछ भी न मगर ,मेरी हर फ़रियाद सुनी होगी
मैं इस ज़ालिम जमाने में ,तुम्हें अपना न कह पाई
यही गर एक खता मेरी ..सजा मैंने ही अपनाई
मोहब्बत में ज़रूरी तो नही ..हर एक बात पूरी हो....
और पूरी होने के लिए ..एक हासिल ज़रूरी हो....
प्रियंवदा
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