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Showing posts from February, 2018

सोंधे स्वप्न

सुनो तुम्हारे गठीलेे बदन के एक एक रोमछिद्रों से टपके हुए स्वेद ने जिस दिन से आलिंगित किया है इस तपती हुई देह की मौन आख्याओ को तकियों की कोरों पर सोंधे से कुछ स्वप्न रतजगे ल...

अब मैं भूलूँ

अब मैं भूलूँ तुम याद लिखो हर इक दिन की फरियाद लिखो क्या छोड़ा कब वह छूट गया क्या तोड़ा और क्यो टूट गया कब दिन जागा इक साँझ ढले किस भोर उगी थी रात लिखो।। अब मैं भूलूँ तुम याद लिखो ......

हिंदी

आँख खुली  देखा ललाट माँ  सजा हुआ था बिंदी से अभिनन्दन करते स्वर निकले अपनी भाषा हिंदी से ।। उम्र बढ़ी सुनते वह लोरी जिन  शब्दों ममता घोली थी फूटे थे जब प्रथम बार इस मुख ने हिं...

जीवन लिपटी जम्हाई में

अल्हड़ बचपन लौट रहा फिर जीवन लिपटी जम्हाई में चक्की चूल्हा खेल रहा मन बस मिट्टी की गहराई में सखा सखी सब ही जुट जाते  चितवन तनिक मचलते ही अंजुरी भर भर खुशियाँ लाते गुप छुप खेल...

आ भी जा

एक शाम वो अजीज़ सी दिल के कितने करीब सी झुकी पलकें गुन रहीं थी धुन कोई एक साज़ पर नज़र तेरी टिक गयी आ उस अंदाज़ ए अंजाम पर दर्द आहों संग उड़े थे साँसों में जो सिमटे रहे तुम खड़े खामोश ...

कहो रीत प्रीत ऐसी कभी तुमने ...

------------------------------------------------ सज कर पियु संग डोली आई  कितने अरमान संग लायी  इक छोर लहू विवश मन बँधी डोर से खिंचती आई यह प्रीत की रीति बनी जग प्रिय तुमने भी कभी निभाई ... इक माटी से दूजी में मिल कुम्हल...