कल्पनाओं के शहर में

कल्पनाओं के शहर में
अक्सर ही तुम्हारे साथ,,,,
बादलों के गलीचे पर लेट
हवाओं से अटखेलियां करते,
नन्ही नन्ही ख्वाहिशों के
सैकड़ों सितारे ....
अपनी हथेली में समेट
फूंके थे मैंने तुम पर,,,,,
एक दिन ,उन सब को बटोर
तुम पूरा चाँद ले आना,,,,
तन्हाई की छत पर
बड़े दिन हो गए ज़मीन को,
अँधेरों से लड़ते हुए,,,,,
प्रियंवदा

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