Posts

Showing posts from February, 2023

लौट आना बेफिकर

लौट आना बेफ़िकर जब भी तुम्हारा दिल करे तोड़ देना नींद तनहा ख्वाब से मिलकर गले ।।  मैं हर पल राह देखती हूँ । जब कोई आवाज़ सुनती हूँ ।। वो इक दर्पण जिसे हमने संग साथ था निहारा किसी इक स्याह लम्हे ने बेतरह तोड़ डाला ।। मैं वो  कतरे बटोरती हूँ । आँच से कांच जोड़ती हूँ ।। कूज कोकिल की बागों ढाई आखर बोलती थी। शहद जीवन का हरपल जो हृदय में घोलती थी। मैं वह झनकार खोजती हूँ । जब कोई परिंदा देखती हूँ ।। चली आती है खुशबू भूल भटके मेरे आँगन में। भिगो जाती है रग रग देह की मन के तड़ागों में ।। मैं वो हर बात खोजती हूँ  जब भी गुलाब देखती हूँ ।। बात कोई बड़ी छोटी समय की बात सब होती । सुलगते रिश्तों के चूल्हों जगत यह सेंकता रोटी ।। ये लिख तुम्हें रोज भेजती हूँ हवा जब मुड़ते देखती हूँ ।। प्रियंवदा अवस्थी©

सिफारिश चाँद से करना

बहुत तनहा रहा है वो सिफारिश इक चाँद से करना आज की रात उसके ख्वाबों की हिफाज़त करना ।।इन्हें चुन बीनते बरसों कई रातों वो जागा है सिरहाने की पिटारी में स्वांसों का धागा है ।। सजायेगा किसी एक दिन वो इनसे ज़िन्दगी अपनी बहुत टूटा बहुत बिखरा कर ले मन की कुछ अपनी  सुनो तुम ए घटा उससे ठिठोली बस आज मत करना बहुत तन्हा रहा है वो .....