एक संदेसा है मेरा
एक संदेसा है मेरा....
जो मिले तुम्हें ,तो पढना जरूर
रात ..फिर बही एक गंगा
तुम्हारे कंधे लग ,
फिर एक यमुना गहराई
तुम्हारे मेरे प्रेम की ..
भोर जब सूरज मुस्काया
अधरों से लग
तुम भी तो निहार रहे थे
कनखियों से मेरी इस पूर्णता को
उस एक पल जाते जाते...
तुमने ही कहा था एक दिन ..
प्रीत अगर सच्ची हो तो –
सपने जागते हुए देखना
देखो सोई नही हूँ पखवारे से
कि सिर्फ तुम्हें पूर्ण होते जो देखना था.....
प्रियंवदा
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