एक तुमसे जुदा होने के बाद
एक तुमसे जुदा होने के बाद हर एक साँस सज़ा हो गयी यूँ ही साथ साथ चलते न जाने क्या खता हो गई कि दिल में हूक उठती है ये आँखें रोज़ बहती हैं फिसलती सी कुछ तारीखें तुम्हारी राह तकती हैं कहीं उस पार से तुम भी ये मंज़र तो देखते होंगे कहो कुछ न मग़र दिल की हर एक फरियाद सुनी होगी मैं इस जालिम ज़माने में तुझे अपना ना कह पाई यही ग़र एक खता मेरी सजा खुद मैंने अपनाई मोहब्बत में ज़रूरी तो नही हर एक बात पूरी हो और पूरी होने को एक अदद हासिल ज़रूरी हो ।। प्रियंवदा अवस्थी