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Showing posts from May, 2016

एक नदी कभी खारी नही होती

एक नदी कभी खारी नही होती पर्वतों से ढलकर, धरती पर उतरकर पथज मालिन्य ढोकर भी सागर के प्रेम में घुलकर भी,,, वस्तुतः नदी की चिरजीवी जीवेषणा उसकी अंतहीन मिठास स्वतः में निरन्तर ...

ख्वाहिशों के पंख

उम्र भर की ख्वाहिशों के पंख जब उगने लगे सैकड़ों चिड़ीमारों के जाल छत बिछने लगे,,, देख पाया कौन किसके हौसलों को डग भरते हुए बगल में दाबी छुरी औ वाहों आह भरने लगे,,,, दोहरे चेहरों से ...

कुछ क्षणिकाएँ

                         1 एक तू ही नही मुझमे जीता ए शहंशाह ए दिल मेरे कुछ तो हम भी कहीं तुझमे जीने का हुनर रखते है मिजाज़ ए बयां कैसा भी हो वक्त बुरा हो या भला मेरे अल्फ़ाज़ तुझे हर...

रख हृद पर हाथ जरा सोचो

जन गण मन अधिनायक गाते देश ध्वजा हर्षित फहराते प्रति वर्ष बहुत इठलाते हो रख हृद पर हाथ जरा सोचो किस बात का जश्न मनाते हो सन् सैंतालीस नही अब यह जब बेड़ी से था यह मुक्त हुआ जन मन ...

स्त्री हूँ मैं (प्रकाशित)

हाँ स्त्री हूँ मैं सृष्टि की सर्वोत्तम कृति सम्पूर्ण सृष्टि हूँ मैं नयनों का यदि आह्लाद हूँ  कदाचित आराध्य भी हूँ मैं क्योंकि - जननी हूँ मैं, भरणी भी हूँ मैं अबला नही ,सबल भ...