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हिंदी किधर गयी

हिंदी किधर गई...... लोग जो तनिक आधुनिक हैं हो रहे दिन चढ़े तक मुँह औंध कर सो रहे पूरब जाने कब सूरज राइज हो गया बदले रँग ढँग देख सरप्राइज हो गया पिता जी मॉडर्न होकर डैड बन गए देववाणी ...