प्रीत की धार कटें दोनों

प्रीत की धार कटें दोनों....

बांधो ऐसी डोर नयन की 

प्रीत पतंग गगन झूमे 

अरमानों के पंख लगा हम

धरती और  गगन चूमें 

आज ना रोके बादल हमको 

किरण न बेध सके तरुनाई 

हो मदमस्त पवन संग बहकें 

तुनक ठुनक संग लें अंगडाई 

दिशा बदल अरुण मुस्काये 

प्रिय हम तुम ऐसे पेंच लड़ाएं 

प्रीत की धार काटें फिर दोनों 

संगम गिर पावन हो जाएँ...

प्रियंवदा 

Comments

Popular posts from this blog

मत बीतो ऐसे तुम मुझमे

बहुत दूर चलना एकाकी

पतझर के मौसम जवानी की फुनगियां