ओ रँगरेजा तेरी छुवन सों
रंग डारो वो मोहना जा पै चढ़ै ना दूजो रंग ओ रंगरेजा तेरी छुवन सौंं चढ़ै नशीली भंग ।। अंग अंग पे नाम छपे, खिल खिल उठै पलाश चितवन ऐसी फेर ,पीर की झरै जरै हर फाँस बहक साँस फगुई चले ठुनक ठुनक नए ढंग ओ रंगरेजा तेरी छुवन सों चढ़ै नशीली भंग ।। नेह अबीर लिपट तन निखरे मानस सीझे राग तेरी लगन नस नस फरके ताल कहरवा आज बिसर काल की चाल यथारथ चलै नवेलो ढंग ओ रंगरेजा तेरी छुवन सों चढ़ै नशीली भंग ।। नख शिख बिपदा नाप कै नज़र झार दूँ आग बिरहा की ठिठुरन मिटै मिलन साजे सोलह सुहाग लुकछिप बाण चलावे अंग अंग हाय अनंग । ओ रँगरेजा तेरी छुवन सौं चढ़ै नशीली भंग । मिलन दिखावा कबहु न चाहे मन में रासो फाग अँगना हर ठनगन चलै प्रीतम बाहर भीजै लाज सुर्ख नयन छुए तन पुखराजी सजूँ जोगनी रंग ओ रंगरेजा तेरी छुवन सों चढ़ै नशीली भंग ।। प्रियंवदा