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Showing posts from February, 2017

फिर मिलना तुम

*एक साँझ,,,, *फिर मिलना तुम मुझे उसी तरह* *सागर के एकांत छोर पर* *सिर्फ और सिर्फ मेरी प्रतीक्षा करते हुए* *जहाँ टिमटिम करते हुए* *कितने ही टूटे बुझते सितारे* *तेज हवाओं से बचाकर*   *छुपा ...

रात बड़ी गहरी है

कितनी ही बार किया जब ख्याल कि बस रोक दूँ यही उसके पाँव मन के पंछी को अब दे ही दूँ कुछ पल सुकून ओ आराम .... तमन्ना जोर से फडफड़ाई शायद बात उसे बिलकुल न भायी भीतर से किसी ने बिलबिलाते ...

आज फिर मैंने तुमको देखा

आज फिर मैंने तुमको देखा ओ प्रिय सतरंगी डबडबाई सी इन आँखों में चिटक छिटक बिखरता तुम्हारा वही इंद्रधनुषी रूप आज फिर मैंने तुमको देखा गीले केशों की कोरों पर नाचती आकाशगंगा...

प्रणय क्या देहों का अभिसार

प्रणय क्या देहों का अभिसार *********************** आज बड़े चुप चुप हो दिखते क्या मुझको पाती हो लिखते जो पूंछा तुमसे कईयों ही बार प्रणय क्या देहों का अभिसार।। नयन के मेल देख प्रियतम अकारण जग रि...

एक टुकड़ा चाँद का

एक जो टुकड़ा चाँद का मिल जाये जो मुझको कहीं अपने मस्तक पर सजा मैं तो चांदनी बन जाउंगी पिरोकर झिलमिल सितारे ओढ़नीे के हर छोर पर ओढ़ चूनर इस स्याह तन मैं  प्रिय मुखर हो जाउंगी भी...

सुख देखा तुझे मैंने

सुख.... तुझे देखा था मैंने एक दिन पीड़ा के उथले आँगन में सबसे बेफ़िकर गिल्ली डंडा खेलते ताज्जुब भी हुआ बहुत तेरे जन्मदाताओं पर कैसे छोड़ दिया तुझे अकेला यूँ ही मंडराने को,इधर उध...

मैं भूलूँ तुम याद लिखो

चलो मैं भूलूँ तुम अब याद लिखो दिन दिन की हर फरियाद लिखो क्या छोड़ दिया क्या छूट गया क्या तोड़ा और क्या टूट गया कब दिन जागा एक साँझ ढले किस भोर उगी थी रात लिखो।। कब स्वप्न सजग हुए ...

सब कुछ बदल जाता यहां

सब कुछ बदल जाता यहाँ बदलते वक़्त के साथ क्या फिर वो मोहब्बत हो क्या जज़्बात की खिदमात...... चाँद तारे तोड़ कर लाने के सब दावे कहीं खो जाते हैं दिल की लगी बस दिल्लगी वादे करवट पलट सो ज...

और तुम कहते ये छोटी बात

पखवारों दर पखवारों जब क्या कुछ न सहेज लेती है एक सियाह अँधेरी रात तब जाकर आते हो प्रिय चाँद तुम लेकर अपने हाथ और तुम कहते ये छोटी बात......... क्या जानो तुम वो पीड़ाएँ तृण तृण अन्धका...

ऐ अश्क तू हो जा रिहा

ऐ अश्क हो जा अब रिहा हर दर्द को आज़ाद कर तन खोखला तो कर लिया अब रूह मत बर्बाद कर,, तुझे पालते रहे खुशियों गम सदियो किये रहे जज़्ब हम हर सब्र ए दरार का वास्ता आँखों से झर जा दफ़्अतन,,,, स...