वो नज़ारों की बात करते हैं

वो नजारों की बात करते हैं 

वो नजारों की बात करते हैं 

पाँव लहरों पे रखते ही ,

वो किनारों की बात करते हैं....

छीन लेती है कफ़न जब ज़िन्दगी 

दिखा कुछ रेशमी से ख्वाब ,

अनसुनी मौत करती है 

तो इशारों की बात करते हैं ..

खेल बैठे जो दिल से यूँ 

कि खुद ही के न रह पाए 

फ़क्त तनहाइयाँ हासिल जिन्हें 

वो हजारों की बात करते हैं ...

जला खुद को अंधेरों में 

जो रातें कर रहे रौशन 

भरी महफ़िल चढ़े दिन भी 

चाँद तारों की बात करते हैं....

लगी दिल की लगी जिनको 

की उनके हाल मत पूंछो 

सुकून ए दिल नही हासिल जिन्हें 

वो गम के मारों की बात करते हैं 
प्रियंवदा

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