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Showing posts from December, 2016

पलटकर देख लेना अच्छा लगता है

मुझे पलटकर देख लेना अच्छा लगता है कई बार सब कुछ सही करते करते कुछ गलत कर देना अच्छा लगता है ।। ऊब जाते हैं कायदे भी एक लीक पे चलते बात तुम्हारी जब कभी भी आये तो कायदों से भटक ले...

चलो दिल को ही अब कलम कर लूँ

मेरे अश्कों को सियाही आज मैं कर लूँ , चलो दिल को ही अब क़लम कर लूँ । ज़ुबाँ कहकर जो अक्सर कह नही पाती, वो हाल-ए-दिल तुुझे मेरे सनम कह लूँ ।। थिरकती नाचती लब पे जो मुस्कान हैं देखी वहीं जलते हुए शोलों से कुछ अंगार रखे हैं । धधक उठते हैं जो अक्सर मेरी आहों से टकराके झुलस कर लफ्ज़ बेवज़ह अबोले ख़ाक होते हैं ।। नज़र झिलमिल मे उतराते  तारे   जो नज़र आते,  वहीं भीगे अधूरे ख्वाब  जो  खार बन बैठे सँजोया उम्र तक जिनको ज़माने से छुपा करके वो हो छलनी मुंदी पलकों से तड़ीपार होते है।। चेहरे पूनम तराशी है कि दुनिया चौंध की कायल ये भीतर के अंधेरों को बख़ूबी ढाँक है लेती , अदा कहते हैं वो इसको नावाक़िफ़ हकीकत से  कयामत जीने के सबके अलग अंदाज़ होते हैं ।। प्रियंवदा अवस्थी

मत छल

मत छल अब ओ कारे बदरा झमक झमक कर तू झर जा चमक गरज संग ले फुहार घर आँगन तन मन तर जा।। झुलस रही चौतरफा माटी ठनक गये कुटिया में कुठले चढ़ा ताप भुइँ छोड़ गगन पे असह्य विपत नकुवन चढ़ बोले...

सूनी आँखें मुड़ मुड़ के देखूँ

सुनो प्रिय ,,, बहुत तपी हूँ तुम बिन मास दिवस ऋतुएं गिनते हवाओं भेजे सन्देश पढ़ते जलते भुंजते.. जो भेजते रहे जब तब अधरों के सूख जाने पर तन बेजान होने की पाकर ख़बर प्रतीक्षा की अनगि...

सन्नाटे भी बोलते हैं

सुना है कभी ? सन्नाटे भी बोलते हैं .... कल बरसों से मौन एक सन्नाटा मन की दीवारें तोड़ बेतहाशा चीखने लगा.... तो दूसरा व्याकुल हो तड़पने लगा, शरीर के भीतर ही कहीं .... कुछ सुर में, कुछ बेसुरे ...

आ भी जा बड़े दिन हुए

एक शाम वो अजीज़ सी,दिल के कितने करीब सी झुकी पलकें गुन रहीं थी,कुछ ज़िन्दगी के साज़ पर तेरी नज़रें आ टिकी तब,एक अंजाम के आगाज़ पर गम लिपट आहों उड़े थे, वो जो सांसों रहे सिमटे हुए तुम खड़...

चितवन चितवन

चितवन चितवन सुर्ख शाम थी धड़कन धड़कन शोर तेरा था पलकों चुनती रात ख्वाहिशें झुके नयन ,,,अहसास तेरा था ।। लहर लहर पर प्रीत लिखी थी गहर गहर कुछ था मन भीतर अँजुरी भर मुस्कान अधर पर क...

सर्पदंश सा एक प्रश्न

सुनो प्रिय,,,, तुम तक पहुंचे मेरे कितने ही मूक सन्देशों तथा मुझमें सम्प्रेषित तुम्हारे उन सैकड़ों उत्तरों में शायद यह सबसे अहम .... दैहिक सत्य के धरातल पर कुछ एक प्रश्नों का भीत...

सब खबर मुझे है

तुम हाथ छुपाये रंग पिया सब खबर मुझे है तेरे चंचल नैन सधे क्यों हैं सब खबर मुझे है हाथ बटाने को क्यों आतुर भोर भये से कारज मेरे रंग ढंग ये बदला बदला खोल रहे सब ये राज तेरे ऊपर से...