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Showing posts from June, 2016

मत बीतो ऐसे तुम मुझमे

मत बीतो मुझमे तुम ऐसे ,जैसे सब कुछ बीत गया समय विकट प्रतिद्वंदी सोचे लो फिरसे वो जीत गया।। एक डगर है एक सफर है दो तन का दो प्राणों का क्या करना प्रिय हमको जग के तरकश वाणो का।। स...

तुम मगर होते नही

बोध होता है तुम्हारा , तुम मगर होते नही बन्द आँखों में बसे क्यों तुम कभी सोते नही छल बल तुम्हारे कर्म में निस दिन हमें हैं दीखते बांटते हर बात लेकिन भव बोझ ढोते क्यों नही ।। स...

प्रेम सिंचित साधना में

खिल उठे हो आज अधरों झिलमिल फुहारों मध्य तुम प्रेम सिंचित साधना में ,प्लावित नयन और साध्य तुम गात इस आघात अगणित है दे रही प्रतिकूल धारा  चीर कर भ्रम का भँवर इस मन ने है तुमको प...

ओ प्रिय सतरंगी

आज फिर मैंने तुमको देखा ओ प्रिय सतरंगी डबडबाई सी इन आँखों में चिटक छिटक बिखरता तुम्हारा वही इंद्रधनुषी रूप...। आज फिर मैंने तुमको देखा गीले केशों की कोरों पर नाचती आकाशगंग...

मेरे और तुम्हारे दरम्यान

मेरे और तुम्हारे दरम्यान अक्सर ही सैकड़ों बातें लहरों सी आकर ठहरी हैं इन नर्म किनारों पर.... और फिर बस,, क्या तुम और क्या मैं ? सुनहले सूरज की तरह औंधते हुए से सारे गम एक दूजे की धर...

अब प्राकट्य तुम्हारा हो

आँख मूँद बैठे हम कबसे अब तो प्राकट्य तुम्हारा हो पिघले माटी, उठे व्योम गन्ध ऐसा सानिध्य हमारा हो।। मन मोह नही कोई हमको फूलों का हार मिले न मिले फ़िक्र नही तन राख बने नदिया की ...

दिन दुःशासन

एक दिन रोज ही उग जाता है मन के आकाश का चीरहरण कर पुनश्च किसी नई महाभारत को शंखनाद सा करते हुए आ खड़ा होता है सम्मुख द्वंद्व प्रतिद्वंद्व में लिप्त विचारों का अथाह सैन्य समूह...

युगों से बस तुम्हारा हूँ

तू चंचल एक नदी मेरी धीर सागर तुम्हारा हूँ तुझी में था तुझी से हूँ युगों से बस तुम्हारा हूँ ।। मचल पड़ता हूँ जब तब देख नभ पर एक चेहरा हृद की गहराइयों तक बस एक उसी का है डेरा वो पू...

अपना भी एक मकान होता

धूप में ही सही अपना भी एक मकाँ होता साथ ज़िन्दगी का कुछ एक सामान होता दर ब दर न होते यूँ खुशनुमा एक जहां होता मगर जो सोचते हैं वो कब और कहाँ है होता ।। मैं इन आहों सही तेरे हर एक गम ...

भीड़ में तन्हा रहने के सीखे यहीं सलीके हैं

भीड़ में तन्हा रहने के सीखे यहीं सलीके हैं इस दुनिया में जीने के सबके अलग तरीके हैं सो भीड़ में तन्हा रहने के सीखे यहीं सलीके हैं ।। अपनी न कहो तुम कुछ सब दूजे की जान लो बड़ी ही खू...

मिलन मधुर था

मिलन मधुर था,,,,,, कुछ जब हम तुम ढूंढ रहे थे कल धुंधलाई दो आँखों में अश्रु धार थी मौन प्रवण था दो नयनो की मुलाकातों में ,,,,, कजरे गजरे गज़र बिंधे सब कम्पित तनमन रुंधे कंठ तब चंद्रकलाय...

एक टूटे हुए सपने का दर्द

एक टूटे हुए सपने का दर्द ******************** भोर की किरण के साथ ही उसका बेपरवाह पलको से यकायक फिसल क्या जाना,,, जैसे किसी मासूम बच्चे की भीड़ के रेले झमेले में यकायक अपनो की ऊँगली छूट जाना,,,, भय म...

तुम्हारे इश्क में

तुम्हारे इश्क में मेरा फ़ना होना मुनासिब था वफ़ा में बेवफाई का सबक मिलना नही भाया ये तेरी एक अदा होगी दिलों से खेल जाने की ढली एक उम्र फिर भी इस तरह ना खेलना आया टूटे फूटे खिलौन...

प्रिय तुम होते जो पास

प्रिय तुम होते जो पास मन ये मगन मोर बन जाता दिशा चतुर्दिक पियु पियु का शोर गगन तक जाता सुन रथ पर चढ़ आ जाते बादल छा जाते हर छोर तृषा धरा की मिट जाती खिल उठते तन मन पोर कर सिंगार ठु...

खिलौना ए जानेमन कर दें

कहो तो दिल ज़मीन रख दें कहो अब आसमा रख दें मोहब्बत में सनम कह दो तो अपनी जां फ़ना कर दें चलेंगे खेल तब तक ये अपने रूठने और मनाने के जब तलक हम तुम्हारी हाँ में अपनी हाँ नही कर दें जल...

एक गहरा समन्दर है, एक दरिया दीवानी है

आती जाती इन स्वांसों में तेरी मेरी कहानी है , एक गहरा समन्दर है एक दरिया दीवानी है ।। लहरों लहरों जीवन जिसका चलता रहता है साहिल साहिल बन्धन जिसको बांधे रहता है।। अब मोह कहो य...

मेरा बचपन लौट रहा है

मेरा बचपन लौट रहा है जीवन की जम्हाई में चक्की चूल्हे खेल रहा पुन जा मिटटी की गहराई में सखा सहेली सब आ जाते चितवन एक तनिक घूमते ही हर मुट्ठी खुशियाँ भर लाती गुप छुप कुछ खेले ग...

एक शाम

एक शाम वो अजीज़ सी दिल के कितने करीब सी झुकी पलकें गुन रहीं थी कुछ ज़िन्दगी के साज़ पर तेरी नज़रें आ टिकी तब एक अंजाम के आगाज़ पर गम लिपट आहों उड़े थे जो सांसों रहे सिमटे हुए तुम खड़े ...

मैं तो तेरी सजन

मैं तो तेरी सजन कौन जाने कि कल वक्त कैसा यहां तुम मिलो ना मिलो मग्न संसार में, चार पल की मिली ज़िंदगानी यहां दो घड़ी को मिलन एक सुंदर सपन आस की साँस घूंघट में टूटे न अब दो घड़ी ही सह...