कई बार ऐसा भी होता है ================= दुनिया की अनुभवी नज़रों में अरसे से एक आलिशान जो एक घर था .... गलती से खुली रह गयी खिड़की के भीतर से कल किसी एक मकान सा झांकता दिखा वह विकल.... रेशमी दोहरनुमा प...
फर्क था बहुत,सचमुच,,,,, एकांत में पसरी हुई तन्हाई और भीड़ में कुचली हुई तन्हाई के मध्य, कितनी ही बार एक खोजी मन और दो सरल नयन,,,,, दोनों के ही घण्टों, रह रह कर होते हुए भावनात्मक सम्प्...