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हृदय आकार बदलने लगता है

ह्रदय आकार बदलने लगता है ************************ हो जाये जब प्रीत ह्रदय आकार बदलने लगता है तन क्या मन क्या जीवन क्या संसार बदलने लगता है कल तक हम जो सांसे लेते थे हम यूँ ही जी लेने को एक ख्याल करत...

किन शब्दो में

किन शब्दो मे तुमको गढ़ लूँ जब जी चाहे तब मैं पढ़ लूँ । बहुत कठिन रस्ते ये प्रियतम स्वांस उलाहन कितना सह लूँ ।। नयन दृष्टि तुम तक जो जाती जग तरकश तीरे खिंच जाती । घोर सबल भीतर तुम कितने किन्तु विवशता झर झर जाती ।। एक विकल्प दो ये पीड़ा हर लूँ शब्द न निकले औ सब कह लूँ ।। अधर मुखरते स्वर हो कम्पित तुम कल्पित तनतरु आच्छादित शाख शाख अँगड़ाते चितवन  चबा चुगलियाँ चले चतुर पवन ।। कहो यत्न सुगन्धि यह ढक लूँ । जिक्र ना हो औ तुम तक चल लूँ ।। चले चन्द्रकला सों जीवन अपना घट बढ़ के आवंटित हर सपना।। काल अमावस नहि कोई गणना । और चन्द्रिका चौमुख सुनो बखना ।। धार दुधार रीति यह कुंद कर लूँ । लोक न लोके मिलन मैं रच लूँ ।। प्रियंवदा