मिलन मधुर था,,,,,, कुछ जब हम तुम ढूंढ रहे थे कल धुंधलाई दो आँखों में अश्रु धार थी मौन प्रवण था दो नयनो की मुलाकातों में ,,,,, कजरे गजरे गज़र बिंधे सब कम्पित तनमन रुंधे कंठ तब चंद्रकलाय...
डाल गुलाबी कुर्ती मखमल जो ओढ़ी धानी ओढ़नी धर कटि पर सतरंगी घाघर चली ठुमक ज्यो मोरनी झनक मटक अह चली पवन मन ही मन कुछ बांचते पात पात चुम्बन कर चिहुंकी उड़ी गगन को नापते लिख भेजे सन्देस पीयु क्या अधर बीच रख इठलाई पता नही आगे पीछे की रह रह फिर नयनन मुस्काई पुष्प पुष्प कर भेंट चली बगियन बगियन तितली सी दृष्टि जिधर स्पर्श करें उठे कौंध वहीं एक बिजली सी प्रीत सजन की बड़ी बावरी इसकी कोई क्या ही बोले लग जाए जिस भी तनमन नभ चूमे मदन हिंडोले ।।
दिल की आँखों से वो सब कुछ देखता रहता है । कितने मुँह की सुनी कि ये प्यार अंधा होता है ।। मन की मन से समझ जो चल दिए सफर में यहां उससे बेहतर कभी कोई रिश्ता यहाँ क्या होता है ।। मौसम...
अभिलाषाएं अगणित अनंत हृद प्रिय तुम संग जिनका कोई ओर न छोर बंधी हूँ तुम संग ऐसी डोर धरो रूप कितने ही कैसी भी छटा बदल लो तुम धूप छाँह शीत बरखा जो कुछ भी ला रख दो तुम विचलित ना होऊ...
बहुत मिलेंगे इस ज़माने में तुझे चाहने वाले कोई मुझ सा अगर मिले तू मुझे खबर करना ।। मुझे खबर है ये कि तू चेहरों को पढा करता है । कोई कभी दिल तेरा पढ़े तू मुझे खबर करना।। जब कभी नम ज...
मंदिर मंदिर क्यो भटकूँ मैं जब तुम हृदय विराजे रग रग तन्मय प्रेम तुम्हारे भाल तुम्ही हो साजे नयन ज्योति आरती उतारूँ मैं तुमपर सब हारी तुम संग लगन लगी है जबसे सुध बुध बिसरी स...
बड़ी गहरी उदासी है रेत फिर आज प्यासी है निचोड़कर रख दिये आसमान ने वजूद क्षार क्षार हुई ज़िंदगी बिखरी बिखरी हवा सी है रौंदा है इस कदर उजालों ने अपनी पैनी निगाहों से गुबार ए दिल ...
नश्तर खुलते ही पुराने हो जाता है सब कुछ बेसाज़ लिपट जाती है जब कानो फिर फिर एक वही आवाज़ रिश्ता ही कुछ ऐसा जिसे पुकारा सृष्टि का आधार होता रहा जो सदियों से समय बेसमय तार तार नि...
ज्ञान का एक असीम भंडार मस्तिष्क बस एक सोच ही होगी कुछ क्लिष्ट पग पग हृदय पथ दिखाता रहा हाथ पकड़ एक यही जड़ न कर पाई कहीं अपना घर क्यों न अब कुछ एक दिन ऐसा कर लें इन पञ्च पटों की आभ...
जो हम ना होते रंग श्वेत श्याम तुम्हे कौन बुलाता ऐसा ही होता है प्रियतम रंग रंग का रिश्ता नाता ।। ज्यों भोर अधूरी बिन रैना धवल काले बिन आधा सुख आधा बिनु दुःख चाखे जय आधी बिन बा...
इन दो आँखों की कश्ती में साजोसामान सभी रखकर। धाराओं का रुख करती हूँ मैं तो तेरी नगरी चलती हूँ ।। पल प्रतिपल पार बुलाते हो औ मुखर इधर मुस्काते हो । किस धार बहूँ बोलो तब प्रिय ...
लौट आना बेफ़िकर जब भी तुम्हारा दिल करे तोड़ देना नींद जो तन्हा ख्वाब लग जाये गले ।। मैं हर पल राह देखती हूँ । जब भी आवाज़ सुनती हूँ ।। वो एक दर्पण कभी जिसको संग साथ था निहारा किसी ...
आज कुछ गुनगुना रहा है दिल आज कोई गीत गाना चाहती हूँ। धड़कने सुर सजा रही कुछ ऐसे साज़ ए दिल मैं बजाना चाहती हूँ।। महकते गेसुओं एक गुथ बनाकर खुशबू तुमपर उढ़ाना चाहती हूँ । तुम चम...
बैठी चुप आगार मैं प्रज्वल दीपक दिशि चार । हर झोंके से लड़ रहीं पलकें निज बाँह पसार।। दिशा भरम ना हो तुम्हेे ये दुनिया सजा बाजार। आ जाओ हृद प्रेम भर मोरी बाती जले कुम्हार ।। टल...
कैसे कहूँ कि कैसे यह गुनाह हो गया अपनी ही रंजिशों दिल तबाह हो गया ।। कोई नही था वो मेरा पर कोई लगा मुझे इस बदगुमानी से मेरा निक़ाह हो गया ।। खिड़की से झाँकता जो आसमाँ का चाँद क्य...
तुझे जीतना तो जुनूँ ना था मेरी हार ही में मेरी जीत है।। तुझसे हारना मेरी प्रीत है । मेरी प्रीत ही मेरी जीत है ।। मेरी फिक्र मत कर रहगुज़र मैं हवा हूँ बहती रही सदा ।। मिल जाऊं हर ...
तुझ पे खर्च दूँ मैं ये जिंदगी कि मेरा कहीं फिर निशाँ ना रहे मुझे तुझको पाकर खोने की दहशत कोई फिर जवाँ ना रहे।। इशक घोल दूँ तेरे मन के समंदर कि बन जाऊँ नमक मैं तेरी बेसुआदी शिका...
आज की रात ज़रा संग बैठो पल दो पल आज की रात मुरादों की रात है हमदम ।। मांग लो मुझसे मुझे मैं ग़ैर नही हूँ कोई मेरे काबू नही जज़्बात सम्हालो हमदम ।। बाद मुद्दत के ये हसीं चाँद रात है ...
ना जाने क्यों गुमसुम से तुम.... मुझमें भी चुप यह आज कौन ... किस गति को थाम रहा अन्तस् स्वांसों उलझा अव्यक्त मौन... फिर झरे आज मन के मोती फिर कुछ एक स्मृतियां रीती ... कुछ कुछ बिखरे छिट...
पियु लाये चुनरिया लाल ओढ़ मैं उन्हें रिझाऊं नख शिख करके श्रृंगार आज खुद पे इतराऊँ आँगन करें बात बहलाव लिए नैन मुख कौतुक भाव चमक उठे हर आहट पाके कब झलक मोरी दिखलाऊँ,,,, कंगन हार ...
दिल अदद पत्थर हुआ यूं चोट खाई ज़िंदगी । आंख ही बहती रही बह ना सकी ये ज़िंदगी ।। वो खफ़ा मुझसे है या फिर है ख़फ़ा ये जिंदगी बात कुछ भी हो मग़र नही ज़िंदगी सी ज़िंदगी।। रोशनी घुलता अंधेर...
जब से तुम मिले हो *************** जबसे तुम मिले हो उच्चारण सरल हो गए शब्दार्थ भावार्थ सब समझ आने लगे सन्दर्भ ही ऐसे सजाए तुमने कि प्रासंगिक हो गईं मेरी हर एक पंक्तियाँ ..... वरना तो हम सिर्फ ...
जब जब तुम मौन हो जाते हो यूं ही बातों ही बातों में जाने क्या कह जाती हैं आंखें तुम्हारी.... कि बिखर बिखर पड़ती हैं मोतियाँ पूरे घर आँगन छनक उठती है पायल सन्नाटों को चीरकर कड़क उठ...