बिना मांगे कहो क्या कुछ दे सकोगे दबे अश्क चमकती हँसी दे सकोगे ।। खुरदरी हो चली है उमर की हथेली ज़रा सी मोहब्बत ए नमी दे सकोगे ।। रिगटते फिर रहे कचरों पे नवजात गज भर की उनको ज़मी ...
अबकी बरस कैसा सावन ये आया पीहर से अब तक सँदेसा न आया तके राह अँखियाँ कि राखी है आई ओ लखिया बाबुल न कर यूँ पराई।। भूला वचन वो जिसने डोली उठाई सदा हाथ सर होगा बोला जो भाई । बरस बीत...
नयनों उससे जा टकराना रग रग हरियाली भर जाना मादकता ले उड़ चली पवन अंग अंग बसंत सा खिल जाना सिकुड़े ठिठके कण उठे लहक डालों नव अंकुर पड़े चिटक रस गन्ध सहित झूमा गुलाब इतराई धरा, अं...
नयनो के जब आशा मुक्तक किरणों की डोर पिरोती हूँ । एक स्वर्णिम भोर सँजोती हूँ तुम कहते हो मैं रोती हूँ ...... शब्दों में कब बाँधा तुमको भावों में रंग रंग रीझी हूँ मुझमे जो तेरा बसा ...
अन्धकार में प्रकाश *************** दिनों दिन मीठी होती गई ज़िन्दगी.... तुम्हारे प्रेम में.. कसैले नही लगते अब कोई कटाक्ष..... गहरी होती गयी आस्थाएं उथले होते गए भ्रम सारे नश्वर है ये देह जानती ...
तुम हाथ छुपाये रंग पिया सब खबर मुझे है तेरे चंचल नैन सधे क्यों हैं सब खबर मुझे है हाथ बटाने को क्यों आतुर भोर भये से कारज मेरे रंग ढंग ये बदला बदला खोल रहे सब राज तेरे ऊपर से दि...