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Showing posts from September, 2017

तुम आओ तब दीप जलाऊं

तुम आओ तब दीप जलाऊँ जीवन के हर तिमिर भगाऊँ रुच रुच माटी छानी काढ़ी इन हाथों ले प्रिय मैं ठाढ़ी दो हाथों ना बने दियाली तुम बिनु कैसे मने दिवाली आस की कलियाँ फूल बनाऊं मन आँगन घर ...

किसी ज़िन्दगी को फ़साने मिले

कदम दो कदम को मिला साथ लेकिन किसी ज़िन्दगी को फ़साने मिले ख़ामोश अब तक जो लब थे उन्हें फ़िर अजब औ गज़ब से तराने मिले ।। यूँ सांसें तो चलती रही उम्र से एक मगर ज्यो ये धरती थमी सी रही धड़का बहुत दिल ढले रात दिन भी कहीं फिर भी ज्यों कुुुछ कमी सी रही एक शाम वह हाथ छूकर यूँ गुज़रा इन आँखों को सपने सुहाने मिले ।। तसव्वुर में बनती रही बेबखत जो वो सूरत जो आधी अधूरी दिखी । जाने वो क्या रंग लेकर चढ़ा नभ कि होकर अधूरी भी  पूरी दिखी ।। ज़मीन आसमान मिल गए थे जहाँ फिर ऐसे कई इक ठिकाने मिले ।। आरजुओं के पंखों शुरू एक सफ़र कुछ अनजान राहें  जुदा से शहर न दिन रात के फ़ासले थे जहाँ  न मालूम वो ले चला था कहाँ सिरजने लगी ढेरो तारे चंदनिया उजालों को सौ सौ बहाने मिले   प्रियंवदा

क्षणिकाएँ

इश्क़ की राह में माना बहुत सी है मुश्किलें । एक नग़मा मोहब्बत का गुनगुनाओ तो सही। लाख कांटे बिछाए ये तेरे जहान पाँव तले। एक क़दम वफ़ा की राह में उठाओ तो सही। जुनून हो रूह में औ शि...