श्याम खेलें खेल लरकैयां

राधा सयानी संग श्याम
खेलि रहे खेल लरकइयाँ,,,,

धाय चढ़े पेड़ जाके लुके 
डालिन की ओट छलिया
कूक रहे ,कोकिल सम
ढूंढे गोरी लिए संग गुइयाँ,,,,,

भटक थकी चार दिसा
सुन सुन नव खगहिं भासा 
रूठ मटक बैठ गयी 
थकी राधे कदम की छैयां,,,,,,

जानि रुठी राधा रानी
रसिया बोले अपनी बानी
धाय लपकी तरु की डाली
छीनी प्रिय की बंसरिया,,,,,

हिरणी सम चिहुँक भागी
  बांधि कटि, प्राण प्रिय की
कोण कोण अह लपट झपट
मधुबन भृमर-भ्रमरिया ,,,,,

जकड़ कटि कन्हाई डोले
  खींची बंसी बंधे केश खोले
रख अधर जो साधे सप्तस्वर
सुधि खोय झनकी पैजनिया ,,,,

प्रियंवदा अवस्थी

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