अच्छा लगता है

मुझे पलटकर देख लेना बहुत अच्छा लगता है
बहुत कुछ उठाते रहे हैं वर्षों से
कभी कुछ फेंक देना अच्छा लगता है ।।

बिखर गए जो अरमां दुपहरी की तपिश सह के
अंधेरों की आड़ रख उनको
नमी की सेंक देना अच्छा लगता है ।।

थक जाता है मन कई बार सबकुछ सही करते
किसी एक दिन न जाने क्यों
कुछ गलत कर देना अच्छा लगता है ।।

ऊब जाते हैं कायदे भी तो एक लीक पे चलते
बात तुम्हारी आये जब कभी भी तो
कायदों से भटक लेना अच्छा लगता है ।।

नचाता रहता है रीतियों का मदारी मानुष को
अदेखी कर हर बन्ध की कभी
खुद की धुन पे नाच लेना अच्छा लगता है ।।

नींद भी आयी बहुत सपने बहुत से अपने हैं
कई बार कुछ एक अपनों के लिए
सपनों को नींद दे देना अच्छा लगता है ।।

मोहब्बत खुदा से करने के तरीके हजारों है
किसी अदना सलीकेे से सही
खुद से मोहब्बत करना अच्छा लगता है ।।

तोडना नीम सच की रही फितरत भले ही
तुझसे मिल लेने की खातिर
जरा सा झूठ बोल लेना अच्छा लगता है ।।

बड़प्पन जीते जीते ऊब जाता दिल ही तो है
यूँ ही बेसबब बेवक्त और बेबात
फिर से बच्चा बन लेना अच्छा लगता है ।।

मेरे तेरे के झगड़े में लगी है कबसे ये दुनिया
तुम्हारे दिल पे अपना हाथ रख
उसे फिर मेरा कह देना अच्छा लगता है ।।

प्रियंवदा अवस्थी

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