तब आते हो प्रिय तुम

पखवारों दर पखवारों ,
क्या कुछ न सहेजती है
जब ये स्याह रात...
तब लेकर आते हो प्रिय
तुम चाँद अपने हाथ
और कहते यह छोटी बात....

क्या जानो तुम पीड़ाएं
तृण तृण तम पीने की
जीवन साधन सुलभ
असह्यतम पीड़ा ,
तुम बिन जीने की
दिन कटते साँसे गिनते
डसे बिरहन नागन रात
और कहते यह छोटी बात....

मुरझाये तनु क्या होता
रेशम का चोला धरना
अधरों पर मुस्कान सजा
मिथ्या बहलावो की गणना
क्षीण आस रिसती नैनो
कपोलो झर झर झरना
शूल चुभाती कठिन अमाँ
चुने तिमिर कुमुद के गात
और कहते यह छोटी बात...

धुन अम्बर कातूँ कपास
तगे है तब दो गज दोहर
झिलमिल बूटे स्वप्निल कोरें
बनाऊँ प्रिय दिन दिन भर
तुमको तो नित रूप बदल
हृदय मेरा छलना आया
धूप छाँह की चौखट पर
पखवाड़ों मन बहलाया
हृदय दहा ठिठुरी काया
नैन झरि बेमौसम बरसात
और कहते यह छोटी बात,,,,,

एक छाप कभी दिखते
तब भी तो निभ जाते
लहर लहर गिर उठते
तट आकर सीप सजाते
आज चटक कल गौण
विचलती टूटे रहरह आस
तुम मेरे मैं सिर्फ तेरी
स्वांसों रखती विश्वास
मन के सिंधु गहन मंथन
सहूँ लहर लहर आघात,,,
और कहते यह छोटी बात,,,,

करूँ शिकायत जब जब
तुमको नादानी लगती है
रोज रोज की कही सुनी 
एको एक कहानी लगती है
कर्म धर्म पथ चलते जाना
प्रियतम नियति लेकिन
बिन नाविक कहो कभी
इक नाव किनारे लगती है
लता विटप से बिछड़ गिरे
और सहे विषम व्याघात
और कहते यह छोटी बात...

प्रियंवदा

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