पियु लाये चुनरिया लाल

पियु लाये चुनरिया लाल पहन मैं उन्हें रिझाऊं
नख शिख कर श्रृंगार आज खुद पर इतराऊँ

आंगन बैठ तके हैं राह
मुखर नैन संग कौतुक भाव
चमक उठे हर एक आहट पे
कब मैं झलक दिखाऊँ

कंगना हार करधनी बाँधूँ
मुँदरी बिछुवे पायल साजूँ
लाल चूड़ियां भर भर हाथों
आज बिना बात खनकाऊँ

लाली बिंदिया झुमका कजरा
वेणी आज सजाऊँ गजरा
रुच रुच चुटकी माँग भरूँ
औ दर्पण लखि मुस्काऊं

रंग महावर मेहंदी रच के
अंग अंग चन्दन रज रज के
लाज काढ़ि ओढू मैं घूंघट
पग प्रीत पदम् रख जाऊँ ,,,
प्रियंवदा 2013

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