तुम्हे बहुत सहेजकर रखा है
रखी मेरी कुछ किताबों में एक वो भी किताब है
जिसपे लिखा मेरा नाम, तुम्हारे नाम के बाद है ।।
माँ ! मुझे वो सब याद है क्या तुम्हें अब भी याद है ?
ये बातें सुन आँखों में फिर एक कहानी घूम जायेगी
पराई हो गयी सी तुम्हारी बिटिया बहुत याद आएगी ।
नटखट चुलबुली हठीली बातें चमकीली हो जाएंगी
मेरी आँख तो नम है माँ! तुम्हारी तो झर ही जाएंगी ।।
बचपन पार करते ही जिसका बस एक ही सपना था
उसे हर हाल में बस तुम जैसा ही दिखना बनना था ।
छोटी सी सन्दूक से वो लंबी सी साड़ी खीँच लाती थी
सारे काम छुड़वा जिसे फिर तुमसे वो बंधवाती थी ।
तुमसे सीखे हर पाठ जब भाई बहनों को पढ़ाती थी
याद होगा ना वो छोटी उम्र कैसा बड़प्पन जताती थी ।।
गुड्डे गुड़िया के ब्याह की वो पहली दावत याद आएगी
आड़ी टेढ़ी कुछ रोटियां फिर से मन सोंधा कर जाएँगी
भोजन से पहले ओ बावली हाथ मुंह तो जरा धो लो
सयानी हो रही हो कपड़े जरा अब तो ठीक से पहनो ।।
उम्र का कद और रीतियाँ फ़टे पांव की बिवाई हो गयी
जाने कैसे तुम्हारी ही जाई यकायक फिर पराई हो गयी
नाना की लिखी एक वो किताब तुम्हे बड़ी अज़ीज़ थी
पर मेरे लिए माँ वो तुमसे पढ़ी हुई बेशकीमती चीज थी
हठ करके जिसे मैं तुमसे अपने साथ ही ले आयी थी
कितनी ही बार पढ़ी थी फिर मेरे बच्चों को पढ़ाई थी
प्रेम धर्म नीति सब कुछ वो तुम जैसा ही अपनायेगी
तुमसे सीखी हर बात अगली नस्ल तक पहुंचाएगी ।।
तुम्हे याद करते अक्सर उँगलियाँ उस नाम पे फेर लेती हूँ
कुछ एक पन्नो के वाक्य तो मैं आज, अब भी टेर लेती हूँ
तुम फ़िक्र मत करना माँ
उस किताब पर मैंने मजबूत सा ज़िल्द चढ़वा रखा है
उस पुरानी सी किताब के एक एक पन्नो की तरह
मैंने तुमको भी बहुत सहेज कर रखा है ।।
प्रियंवदा अवस्थी
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