डाल गुलाबी ओढ़नी
डाल गुलाबी कुर्ती मखमल जो ओढ़ी धानी ओढ़नी
धर कटि पर सतरंगी घाघर चली ठुमक ज्यो मोरनी
झनक मटक अह चली पवन मन ही मन कुछ बांचते
पात पात चुम्बन कर चिहुंकी उड़ी गगन को नापते
लिख भेजे सन्देस पीयु क्या अधर बीच रख इठलाई
पता नही आगे पीछे की रह रह फिर नयनन मुस्काई
पुष्प पुष्प कर भेंट चली बगियन बगियन तितली सी
दृष्टि जिधर स्पर्श करें उठे कौंध वहीं एक बिजली सी
प्रीत सजन की बड़ी बावरी इसकी कोई क्या ही बोले
लग जाए जिस भी तनमन नभ चूमे मदन हिंडोले ।।
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