कल चाँद कह रहा था
ये जो रंग भर दिए तुमने बेरंग फ़िज़ाओं में
खुशबू सी भर गई है बहती सी हवाओं में ।।
होठों पर गीत ओ सरगम देकर चले गए हो ।
कोई नूर बस गया है बुझती सी निगाहों में ।।
तेरी बातें सिरजकर के रख ली हैं सिरहाने
खामोशियाँ मचलके लगी ख्वाब गुदगुदाने ।।
इस दौर ए इश्क की तो हर बात है सुहानी
मेरे लफ्ज़ लगे गढ़ने मीठी सी एक कहानी ।।
कल चाँद कह रहा था तुम भी बदल रहे हो।
कागज़ पे दिल के कोई एक बात लिख रहे हो।।
वो बात चलो न हम तुम आईने को बतलायें।
नज़रें चहक ले और कुछ हम भी बहक जाएं ।।
प्रियंवदा अवस्थी©2013
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