आज की रात मेरे संग

आज की रात ज़रा संग बैठो पल दो पल
आज की रात मुरादों की रात है हमदम ।।

मांग लो मुझसे मुझे मैं ग़ैर नही हूँ कोई
मेरे काबू नही जज़्बात सम्हालो हमदम ।।

बाद मुद्दत के ये हसीं चाँद रात है आई
महके बहके से हालात थाम लो हमदम ।।

कुछ नशा है अजब आज इन नज़रों मे
घूँट दो ही सही तुम ये जाम लो हमदम ।।

सुलगती सांसों से ये चाँद ना पिघल जाए
बढ़के पहलू में इसे तेरे बांध लो हमदम ।।
प्रियंवदा अवस्थी©2013

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