तुझे जीतना तो जुनून न था

तुझे जीतना तो जुनूँ ना था
मेरी हार ही में मेरी जीत है।।
तुझसे हारना मेरी प्रीत है ।
मेरी प्रीत ही मेरी जीत है ।।
मेरी फिक्र मत कर रहगुज़र
मैं हवा हूँ बहती रही सदा ।।
मिल जाऊं हर एक राह में
तेरे जिस्म की ही पनाह में।।
कभी साँस बनके चली यहाँ
कभी खुशबू बनके उड़ी उधर ।।
प्रियंवदा अवस्थी©2012

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