बड़ी गहरी उदासी है
बड़ी गहरी उदासी है
रेत फिर आज प्यासी है
निचोड़कर रख दिये
आसमान ने वजूद
क्षार क्षार हुई ज़िंदगी
बिखरी बिखरी हवा सी है
रौंदा है इस कदर उजालों ने
अपनी पैनी निगाहों से
गुबार ए दिल फलक है उठा
बोझल बोझल वो घटा सी है
बवंडर उठ उठ थमे सतहों
अब ये तूफान भी मचल जाए
बदले मौसम मिजाज़ अपना
आज कुछ नम वो हो जाये
बड़ी गहरी उदासी है
रेत फिर आज प्यासी है .....
प्रियंवदा अवस्थी©2015
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