कोई मुझ सा अगर मिले
बहुत मिलेंगे इस ज़माने में तुझे चाहने वाले
कोई मुझ सा अगर मिले तू मुझे खबर करना ।।
मुझे खबर है ये कि तू चेहरों को पढा करता है ।
कोई कभी दिल तेरा पढ़े तू मुझे खबर करना।।
जब कभी नम जाएं बेतरह तेरे ग़म के बिस्तरे।
जज़्ब एक आह भर करे तू मुझे खबर करना ।।
मुझे निभा न निभा तू कोई अफसोस अब नही।
फ़ना तुझपे कोई ज़िन्दगी करे मुझे खबर करना।।
दिल के सौदों में कभी मुनाफ़ा नही देखा जाता ।
मिटा हस्ती रोशन दर तेरा करे मुझे खबर करना ।।
एक मुद्दत से मुझमे जिया है मैंने तुझको ए सनम।
कोई तुझमें जब धड़क उठे तू मुझे खबर करना ।।
प्रियंवदा अवस्थी©2015
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