युगों से बस तुम्हारा हूँ

तू चंचल एक नदी मेरी
धीर सागर तुम्हारा हूँ
तुझी में था तुझी से हूँ
युगों से बस तुम्हारा हूँ ।।
मचल पड़ता हूँ जब तब
देख नभ पर एक चेहरा
हृद की गहराइयों तक
बस एक उसी का है डेरा
वो पूनम चाँद तुम मेरा
आसमां मैं तुम्हारा हूँ ।।
जिसके हृदय लग तुम
मचलती हो ढलकती हो
सिमट जिन बाहु पाशों में
मचलती हो थिरकती हो
वो अल्हड़ सी लहर है तू
मैं तेरा दृढ किनारा हूँ ।।
छलक उठती है नैनों में
वो कोमल भावना हो तुम
धरा गिरकर उपज पड़ती
वो उर्वर याचना हो तुम
तुम जल की बूँद हो शीतल
सघन घन मैं तुम्हारा हूँ ।।

तुझी से था,तुझी में हूँ
युगों से बस तुम्हारा हूँ
प्रियंवदा

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