तुम्हारे इश्क में

तुम्हारे इश्क में मेरा फ़ना होना मुनासिब था
वफ़ा में बेवफाई का सबक मिलना नही भाया

ये तेरी एक अदा होगी दिलों से खेल जाने की
ढली एक उम्र फिर भी इस तरह ना खेलना आया

टूटे फूटे खिलौनों से रिश्ता अपना है मुद्दत का
अजीजो से बेवजह मुझको नही मुंह मोड़ना आया

शुमार हो कल शायद ये फलसफा मोहब्बत के सलीकों में
ऐसे मजमूनो को लिफाफों रख भेज सकना नही आया

प्रियंवदा

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