मैं भूलूँ तुम याद लिखो
चलो मैं भूलूँ तुम अब याद लिखो
दिन दिन की हर फरियाद लिखो
क्या छोड़ दिया क्या छूट गया
क्या तोड़ा और क्या टूट गया
कब दिन जागा एक साँझ ढले
किस भोर उगी थी रात लिखो।।
कब स्वप्न सजग हुए पिंजर में
कब नींद जगी रही बंजर में ।।
कुछ पुष्प संजो लाई फिर मैं
कांटों इनके अलगाव लिखो ।।
सावन मुरझाया कब डालों पर
पतझर ढुलके कब गालों पर ।।
कब ओस झरी थी सिहरे तन
कब मन पर जले अलाव लिखो ।।
स्मृति की पसरी इस चादर पर
पल प्रतिपल हुए रिसाव लिखो ।।
विपरीत वायु वेगों चलकर कैसे
किये बसन्त के छिड़काव लिखो।।
चलो मैं भूलूँ तुम अब याद लिखो
प्रियंवदा
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