सब कुछ बदल जाता यहां
सब कुछ बदल जाता यहाँ
बदलते वक़्त के साथ
क्या फिर वो मोहब्बत हो
क्या जज़्बात की खिदमात......
चाँद तारे तोड़ कर लाने के
सब दावे कहीं खो जाते हैं
दिल की लगी बस दिल्लगी
वादे करवट पलट सो जाते है
चाँद भी तो छुप जाता कहीं
चौदह चमकती रात के बाद......
सब कुछ बदल जाता यहाँ.....
गमज़दा सी नम ख्वाहिशें
शब की गहरी सियाही ओढ़कर
सिमट जाती हैं वक़्त के इस
बहरूप पन को कोसकर
भूल जाता वो सब जादूगरी
फिर फिर होते नही तिलस्मात.....
सब कुछ बदल जाता यहाँ
क्या कसम क्या वायदे
क्या रस्म ए वफ़ा के कायदे
सिखा देता वक़्त इन्हें भी
उठाना वक़्त पर ही फायदे
लौटेगा कभी गुज़रा ज़माना
बन जाते फ़क्त कोरे खयालात
सब कुछ बदल जाता यहाँ
प्रियंवदा।।
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