बाहर की आँखों का देखा
महानता कब हुई यहां
युगों की मोहताज़
तुम भी रच सकते हो
एक रामायण आज
राम और सीता
किसने कहा-
कि इनका युग बीता?
भरत और लक्ष्मण
आज भी कर सकते हो तुम
ऐसे किरदारों का अनावरण
कारण ये कि तुम
बस राम राम ही रटते रहे
और दिनोंदिन बस घटते रहे
बाहर की आँखों का देखा
प्रायः भ्रांतिमान होता है
मरा मरा जपने से भी
कदाचित
किसी वाल्मीकि का
अभ्युत्थान होता है....
प्रियंवदा
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