उनसे भेंट हुई सावन में
उन से भेंट हुई सावन में
नयना चहक उठे आंजन में
स्वांस स्वांस संगीत मिलन का
घुंघरू झुनक उठे झांझर में
कर सोलह सिंगार दृष्टि से
होय हरित मन प्रीति वृष्टि से
प्रीति डोर गुँथ ली वरमाला
सजा मेघ मंडप आंगन में
पुष्प लता कलियाँ हरषाई
मटक ठुमक पुरवा अंगड़ाई
उफ़नाये सब ताल तलैया
मोर युगल मदमत नाचन में
चढ़ छत पर मुस्काई बरखा
स्वेत श्याम का भेद न परखा
खेल फुहारों के मतवाले
अबकी पिया लगे सावन में
प्रियंवदा अवस्थी
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