अब मैं भूलूँ

अब मैं भूलूँ तुम याद लिखो
हर इक दिन की फरियाद लिखो
क्या छोड़ा कब वह छूट गया
क्या तोड़ा और क्यो टूट गया
कब दिन जागा इक साँझ ढले
किस भोर उगी थी रात लिखो।।

अब मैं भूलूँ तुम याद लिखो .....

कब सपन सजग थे पिंजर में
कब नींद सबल थी बंजर में ।।
कुछ कुसुम उठा लाई हूँ मैं
तुम काँटो हुआ जुझाव लिखो ।।

सावन कब सूखा डालों पर
पतझर ढुलके कब गालों पर ।।
कब झरी ओस सिहरे तन पर
कब मन पर जले अलाव लिखो ।।

इक बूंद बनी प्रिय कब सागर
कब छलक उठी मन की गागर ।।
स्मृति की उजली चादर पर
पल प्रतिपल द्रवित रिसाव लिखो ।।

कब मन घबराया सपनो में
कब जी भर आया अपनो में
विपरीत वायु चलकर कैसे
बदला ऋतुओं का बर्ताव लिखो  ।।

कब पीर हँसी बनकर ठहकी
कड़वे फल गटके हँसी खुशी
रूठे मन भी किस बात प्रिये
हुए बासन्ती छिड़काव लिखो।।

अब मैं भूलूँ तुम याद लिखो

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