तुम कितना बोले
शब्द
तुम जब जब भी
निशब्द हुए
कितना बोले फिर
ह्रदय से लग
सचमुच
कितने कोमल
महसूस की है
अक्सर उँगलियों के
पोरों पर तुम्हारी
निरीह छुवन
जब जब भी
तुम निशब्द हुए ....
तुम्हारे मूक स्पंदन
तार तार करते
झंकृत हुए हैं मुझमे
सुना होगा तुमने
मेरे शब्दों में
अक्सर ही तुमको
बोलते हुए......
प्रियंवदा
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