सुना कि प्यार अँधा होता है
दिल की आँखों जब वो सब कुछ देख लेता है ।
कितने मुँह फिर ये सुना कि प्यार अंधा होता है ।।
मन से मन की सब समझ चल पड़े इस सफर में
इससे बेहतर कभी कोई रिश्ता यहाँ क्या होता है ।।
मौसमों के साथ खिलते झरते हैं पत्ते शाखों पर
राह ए वक्त चलकर ही कोई रिश्ता जवाँ होता है ।।
प्यार होता है जिधर पनप जाते गिले शिकवे उधर
बिना पतझर हुए बहारों का मजा बेअसर होता है ।।
रूठ जाना यूँ ही एक दिन तुम भी इश्क में ए सनम
सुना रूठे को मनाने का आसमाँ तक असर होता है।।
प्रियंवदा अवस्थी
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