तुम पूरा चाँद ले आना

कल्पनाओं के शहर में
अक्सर ही तुम्हारे साथ,,,,
बादलों के गलीचे पर लेट
हवाओं से अटखेलियां करते,
नन्ही नन्ही ख्वाहिशों के
सैकड़ों सितारे फूंके थे 
मैंने तुम पर,,,,,
उन सब को बटोर एक दिन
तुम पूरा चाँद ले आना,,,,
बड़े दिन हुए ज़मीन को,
अँधेरे से लड़ते हुए,,,,,
19/2/2016
प्रियंवदा अवस्थी

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