हो जाये जब प्रीति
ह्रदय आकार बदलने लगता है
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हो जाये जब प्रीति ह्रदय आकार बदलने लगता है
क्या तनमन क्या जीवन सारा संसार बदलने लगता है
कल तक हम जो स्वासें लेते थे बस यूँ ही जी लेने को
एक ख्याल प्रिय का ,इनका व्यवहार बदलने लगता है ...
दौर कोई भी हो वह दिन हो या फिर गहन अंधेरी रात
सूरज चाँद धरा ऋतु सबका प्रतिहार बदलने लगता है..
ये मेरा और ये तेरा के किये झगड़े जहाँ साल दर साल
एक लौ अन्तस् जगते सारा अधिकार बदलने लगता है
दुःख की गागर भरी पड़ी या सुख की चादर छोटी हो
तनिक दृष्टि पड़ते प्रिय की प्रतिकार बदलने लगता है ....
हो जाये जब प्रीति ...ह्रदय आकार बदलने लगता है
प्रियंवदा अवस्थी
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