क्षणिकाएँ

इश्क़ की राह में माना बहुत सी है मुश्किलें ।
एक नग़मा मोहब्बत का गुनगुनाओ तो सही।
लाख कांटे बिछाए ये तेरे जहान पाँव तले।
एक क़दम वफ़ा की राह में उठाओ तो सही।
जुनून हो रूह में औ शिद्दत हो फ़ना होने की ।
ज़िन्द को ज़िन्द की तरह निभाओ तो सही।
मंज़िल आप ही आप आ लगेगी तेरे गले ।
तह ए दिल से उसे एक बार बुलाओ तो सही।

2
नींद पलकोंं से ले उड़ा वो फिर भी
ख़्वाब आँखों में सजाना चाहता है।
ज़मीने दिल कबकी हो गई उसकी
उसपे मर्ज़ी से आना जाना चाहता है ।
बड़ी पेंचदा फ़ितरत रूह ओ तन की
चाहते ज़रूरतो में मिलाना चाहता है ।
जो उसका होकर भी है नही उसका
वो उसपे हक़ आजमाना चाहता है ।।

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