सिफारिश चाँद से करना


बहुत तनहा रहा है वो सिफारिश इक चाँद से करना
आज की रात उसके ख्वाबों की हिफाज़त करना ।।इन्हें चुन बीनते बरसों कई रातों वो जागा है
सिरहाने की पिटारी में स्वांसों का धागा है ।।
सजायेगा किसी एक दिन वो इनसे ज़िन्दगी अपनी
बहुत टूटा बहुत बिखरा कर ले मन की कुछ अपनी 
सुनो तुम ए घटा उससे ठिठोली बस आज मत करना
बहुत तन्हा रहा है वो .....

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