कविताओं के इतिहास

कविताओं के अपने
अलग ही इतिहास होते हैं
कुछ दर्दीले कुछ सुखद
कुछ प्रीत के पाग में पगे
कुछ एक मीठे और रसीले ...
धूप में जीभर तपकर
आँधियों में पोर पोर सुलगकर
सोंधे और सच्चे हुए से इतिहास...

जवानी की नमकीन रवानी में
बहकर ही प्रौढ़ होता है
किसी मीठी सी कविता का
कटु कसाय इतिहास.....

तन की झुर्रियों पर
झूला घालने लगती हैं
भावनाएं जब सावनी झूले....

वक्त की गर्द की मोटी पर्त से
आँखों पर पड़ गए जालों के
उस पार दिखने वाला
उसका आसमानी चाँद ...

उतना ही चटक होता जाता है
जितना जीवन की मुंडेर पर बैठी
साँझ के आँचल में डुबकी रात
अधिक स्याह और गहराती जाती है

बेसाख्ता धूप खाया हुआ
तन और मन
सूरज की तपिश सहकर
रंगहीन से हो गए
निर्जीव दिखते नाखूनो से
उकेरने लगता है अनुभव
रेतीली धरती पर
इंद्रधनुषी रंगों का इतिहास....

गठीली हुई उँगलयों के मध्य
सिकुड़े हाथों में उलझकर
मुस्करा उठती है कलम
 
खिल उठता है फिर से
किसी डाली पर खिलकर
मुरझाते हुए सूखे गुलाब का
मादक और सुगंध भरा इतिहास

फिर लिख उठता है
किसी कवि का मन
उपवन ....माली ........
फूल....... शूल.......
जीवन....
प्यार ....
और संसार ........
प्रियंवदा अवस्थी

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