हृदय आकार बदलने लगता है

ह्रदय आकार बदलने लगता है
************************
हो जाये जब प्रीत ह्रदय आकार बदलने लगता है
तन क्या मन क्या जीवन क्या संसार बदलने लगता है
कल तक हम जो सांसे लेते थे हम यूँ ही जी लेने को
एक ख्याल करते प्रिय का व्यवहार बदलने लगता है ...

दौर कोई भी हो दिन हो या फिर हो अंधियारी रात
सूरज चाँद सितारें सब का प्रतिहार बदलने लगता है..
ये मेरा और ये तेरा के हुए झगड़े यहां साल दर साल
एक लौ भीतर लग जाते ही अधिकार बदलने लगता है

मेघ सघन हो तमस गहन हो पथ दुर्गम हो कैसा भी
प्रीति भाव अनुलोम सकल व्यापार बदलने लगता है
दुःख की गागर हो भारी या सुख की चादर छोटी हो
एक निगाह पड़ते प्रिय की  प्रतिकार बदलने लगता है ....

हो जाये जब प्रीत ...ह्रदय आकार बदलने लगता है

प्रियंवदा अवस्थी

Comments

Popular posts from this blog

मत बीतो ऐसे तुम मुझमे

बहुत दूर चलना एकाकी

पतझर के मौसम जवानी की फुनगियां